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वूड बी बहू – पार्ट वन

Indian Bride
Written by Social Mela

यह छोटी सी कहानी आँचल द्वारा लिखी गयी है | आँचल मूलतः बिहार के सीतामढ़ी से है फ़िलहाल  दिल्ली में एक साहित्यिक पत्रिका में कार्यरत है, उन्हें  कच्ची कविताएँ और बेतरतीबी से लिखना पसंद है |


indian bride

इतवार के रोज़ दोपहर बारह तक लड़के के परिवार को आना था । लेकिन कॉल आया कि किसी ज़रूरी काम के लिए रुके हैं, फ्री होकर ही आएंगे । लेकिन तब भी कोई समय नहीं बताया । शाम 6 बजे कॉल आया कि आधे घंटे में आ रहे हैं। लड़के के माता-पिता, चाचा-चाची और दो बहनें । (इसके पहले ये भी नहीं पता था कि कितने लोग आ रहे हैं) ख़ैर, ख़ातिरदारी शुरू हुई, नाश्ते परोसे गए। अमूमन होता ये है कि औरतें घर के अंदर वाले कमरे में चली आती हैं, तो वैसा ही हुआ। लड़की गयी, पानी का ग्लास रखा और साइड में जाकर खड़ी हुई,

लड़के की माँ: तुम्हें देखने आएं हैं और तुम्ही जा रही हो।
लड़की: देखिये ना, देखिये!
चाची: जॉब करती हो?
– जी
– क्या सोचा है, आगे भी करना है?
– हाँ, बिलकुल
– तो कैसे करोगी सब घर-परिवार ?
– कैसे मतलब क्या! करती हैं लड़कियाँ.. दोनों संभल जाता है आराम से ।
– हॉबीज़ क्या है?
– पढ़ना, गाने सुनना और लिखना।
– अच्छा, लिखती भी हो? (अभी तक जॉब के विषय में कुछ भी नहीं पूछा गया था)
एक बहन: पर हमें तो कोई ऐसा चाहिए, जो घर पर माँ के साथ रह सके.. क्यूंकि सब चले जाएंगे तो कोई तो हो।
लड़की: चुप *मन में – सबसे अच्छा,नौकर रख लो तो*
चाची: नाम क्या है तुम्हारा?
लड़की: *ठहाका लगाकर हँसते हुए* अपना नाम बताया
सब आपस में: पूछो ना, तुम पूछो, क्या पूछे, कुछ पूछ लो
एक बहन: तो आप जॉब करोगे ही (ऐसे जैसे वो अभी के अभी हाँ या ना का फ़रमान सुना कर चल देगी)
लड़की: हाँ। तुम तो देख ही रही हो ना, हमारी जनरेशन कैसे चल रही है.. सब काम कर रहे हैं.. बच्चे भी पैदा कर रहे हैं और घर भी संभाल रहे हैं, तुम्हारी ऐज क्या है?
बहन: 23
लड़की: तो तुम तो समझ रही होगी सब। हाँ, ज़िन्दगी में आगे कैसे क्या होगा, ये तो सिचुएशन पर डिपेंड करता है।
बहन: सब कर रहे हैं, आप अपने बारे में बताइये ना
लड़की: हाँ, मैं जॉब करुँगी ही ।
माता जी: तो कमी किस चीज़ की है!
लड़की: कमी की बात नहीं है, जॉब करने से बहुत समझदारी आती है। रेस्पोंसिबल होते हैं, इंडिपेंडेंट होते हैं।
माता जी: और अगर लड़के ने मना कर दिया तो?
लड़की: तब तो ये ग़लत है। बहुत ग़लत है ।
माता जी: ग़लत कैसे हुआ?
लड़की: कैसे नहीं हुआ! जब कोई बात नहीं हुई है, बात पक्की नहीं है, बात आगे नहीं बढ़ी है और कोई इस तरह की पाबंदी लगा रहा है तो वो आगे चलकर कितनी पाबंदियाँ लगाएगा!
दूसरी बहन: पाबन्दी कहाँ है कोई, बस जॉब करने को ही तो मना कर रहे हैं और भइया को भी चाहिए जो माँ के साथ रहे ।
लड़की की माँ: आराम से जवाब दो
लड़की: ठीक से ही तो बोल रहे हैं माँ या तो फिर चुप ही रहती हूँ।

*शोर शोर शोर शोर शोर शांति*

चाची: खाना बना लेती हो?
– हाँ
– क्या क्या बना लेती हो?
– सब कुछ बना लेती हूँ ।
– हाँ मतलब वही क्या क्या? हम को तो पता नहीं है, तुम ही बताओ
– दाल चावल रोटी सब्ज़ी भर्ता चटनी और पानी उबाल लेती हूँ ।
– पानी तो छोटे बच्चे भी उबाल लेंगे ।
– आजकल वही करना नहीं आता ।
– नहीं, कुछ स्पेशल बनाती हो?
– ऐसे कैसे किस चीज़ का नाम लें! हाँ, कुछ कुछ ट्राई करती रहती हूँ।
– मतलब कोई डिश, डोसा हो गया, इडली हो गया
– देखा है माँ को बनाते हुये, ख़ुद से बनाया नहीं कभी.. ज़रुरत पड़ी तो बना लेंगे
– नहीं, सीखना चाहिए सब कुछ..आजकल लड़की को सबकुछ आना चाहिए ।
– लड़की *मन में – तो फिर सबकुछ में जॉब करना भी तो आना चाहिए। और ज़रूरी तो दाल-चावल ही बनाना है, डोसा बनाना आ भी गया तो क्या रोज़ वही खाएंगे!*

मन में इसलिए कि कई बार लड़कियों पर प्रेशर होता है, पहले चरण में ही माँ-बाप की इज़्ज़त बनाने का। मन मार कर चुप रहना पड़ता है.. सोचिये, लावा कितना उबलता होगा लड़कियों के अंदर।

एक बहन: क्या पसंद है आपको?
लड़की: अभी बताया था, लिखना, पढ़ना आदि आदि
बहन: घूमना पसन्द है?
लड़की: हाँ, बहुत पसंद है.. बहुत घूमती भी हूँ।
दूसरी बहन: जीन्स टॉप पहनते हो?
लड़की: *मन में* (ऐसे सवाल तो गाँव में भी नहीं करते होंगे।)
जवाब देते हुए, हाँ ।
चाची: और साड़ी पहनती हो?
लड़की: हाँ, ख़ूब पहनती हूँ।
चाची: ऐसा तो नहीं कि साड़ी पहन कर काम नहीं होगा ।
लड़की: अब ये तो पता नहीं, पर पहनती हूँ।

इस बीच जब चाय-पकौड़े लाये जा रहे थे, तब लड़की ने उनकी टेढ़ी मुस्कान और मज़ाक उड़ाते हुए फुसफुसाते शब्द सुने
~चटनी बना ही लेती है.. घुमती है ही.. पानी उबालने आता ही है~

लड़की के अंदर पानी नहीं, बहुत कुछ उबाल मार रहा था।

और अचानक उन्होंने लड़की की माँ को कहा, देखिये, आपकी बहू कैसे काम कर रही है, हमें भी वैसी ही चाहिए।

लड़की: *मन में – ये तो जनरल एटीकेट है कि किसी के घर कोई जाएगा तो कोई ना कोई तो काम करेगा ही। तब जबकि लड़की और उसकी माँ को आपने अपने पास बिठा रखा हो।*

और अचानक द्विअर्थी सरकैस्टिक बातों से तुलनात्मक अध्ययन किया जाने लगा । आपकी बहू बहुत अच्छी है, कहाँ की है, जैसे वाक्य। साफ़ लग रहा था कि वो लड़की को एक झटके में नीचा दिखाने का पूरा प्रयास कर रहे हैं । ख़ैर, पकौड़े खाये गये, डकार मारे गए।

विदाई हुई ।

लड़की: आपने उनको बताया नहीं था कि मुझे जॉब करनी है!
लड़की के पिता: बताया था, उसके पिता और चाचा को बार बार बताया है।
– तो उन्होंने अपने घर की औरतों को नहीं बताया क्या!
– बताया होगा, शायद सोचा हो पैसे का दम दिखा कर ग्रिल किया जाए ।
– ये टॉर्चर था मेरे लिए, बहुत बड़ा टॉर्चर था। इनका लड़का करता क्या है?
– कुछ नहीं । अपना बिज़नेस है और इकलौता है तो वही संभालेगा ।

*शोर शोर शोर शोर शोर भयंकर शोर… शांति*

[दोनों परिवारों की मुलाक़ात तीन साल पहले भी हुई थी, तब बात आयी-गयी वाली हो गयी। कुछ महीनों से लड़के के पिता दुबारा मुलाक़ात करने की बात कर रहे थे । इसलिये समाज और बिरादरी वाला संस्कार निभाने के लिए आमंत्रण दिया गया.. आमंत्रण क्या, उन्होंने ख़ुद को आमंत्रित कर लिया। शायद उन्हें लगा हो, लड़की अब तक कुंवारी है तो उनकी बात मानने को तैयार हो जाएंगे।]


अरेंज मैरेज  आधारित इस कहानी पर लेखिका की टिपण्णियों के लिए पढ़े वूड बी बहू – पार्ट टू।

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